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पोस्टर या व्हाट्सऐप संदेश बनाते समय हर कोई एक दमदार नारा ढूँढता है। पर इंटरनेट की ज़्यादातर सूचियाँ बिना स्रोत के होती हैं। इसलिए इस लेख में सिर्फ़ भारत निर्वाचन आयोग के सत्यापित संदेश और नियम लिए गए हैं।
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- प्रचार का नारा और जागरूकता संदेश: फ़र्क क्या है?
- ऑनलाइन मिलने वाले नारे: असली हैं या सिर्फ़ उदाहरण?
- चुनाव आयोग के आधिकारिक संदेश
- SVEEP: जागरूकता सामग्री कहाँ मिलेगी
- अच्छा चुनावी संदेश कैसे लिखें
- आदर्श आचार संहिता: कौन-से संदेश नहीं लिखने चाहिए
- सोशल मीडिया, पोस्टर और बल्क संदेश
- तुलना तालिका
- उपयोग के हिसाब से चेकलिस्ट
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुख्य बातें
- 2024 के आम चुनाव के लिए आयोग का थीम “चुनाव का पर्व, देश का गर्व” था।
- SVEEP आयोग का मतदाता शिक्षा कार्यक्रम है, जो 2009 से चल रहा है।
- सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापन पूर्व-प्रमाणन के दायरे में आते हैं।
- बिना स्रोत की सूचियों के नारों को असली इतिहास न बताएँ।
प्रचार का नारा और मतदाता जागरूकता का संदेश: फ़र्क क्या है?
प्रचार का नारा किसी दल या उम्मीदवार के पक्ष में होता है, जबकि जागरूकता संदेश सभी को मतदान के लिए प्रेरित करता है। दोनों दिखने में मिलते-जुलते हैं, पर मक़सद अलग है।
“हर वोट ज़रूरी है” जैसी बात किसी का पक्ष नहीं लेती। वहीं किसी उम्मीदवार का नाम या चिह्न जुड़ते ही संदेश प्रचार बन जाता है।
क्या मैं अपने संदेश को निष्पक्ष कह सकता हूँ?
तभी, जब उसमें किसी दल, उम्मीदवार या चिह्न का संकेत न हो। अगर संदेश किसी एक पक्ष को फ़ायदा पहुँचाता है, तो उसे निष्पक्ष न कहें।
अपनी स्थिति के अनुसार कौन-सा प्रकार चुनें?
स्कूल, मोहल्ले या सामाजिक समूह के कार्यक्रम के लिए जागरूकता संदेश ठीक रहता है। अगर आप किसी उम्मीदवार की टीम में हैं, तो प्रचार का नारा बनेगा, और तब आचार संहिता के नियम सीधे लागू होते हैं।

ऑनलाइन मिलने वाले नारे: असली हैं या सिर्फ़ उदाहरण?
कई पेज बिना प्रमाण के नारे जोड़ देते हैं, इसलिए उन्हें ऐतिहासिक या आधिकारिक नहीं मानना चाहिए। खोज में ऊपर दिखने वाला पेज भी इस बात की गारंटी नहीं है।
Duniya Hai Gol के पेज पर “सही चुनाव, बड़ा बदलाव” और “5 साल विकास के, 5 साल विश्वास के” जैसे नारे सूचीबद्ध हैं। पर उस पेज पर यह प्रमाण नहीं मिलता कि ये किसी असली चुनाव अभियान में इस्तेमाल हुए। इन्हें सिर्फ़ नमूना समझें।
अमर उजाला के 2014 के एक लेख में उस समय की राजनीति के और पुराने चुनावी नारों के संदर्भ मिलते हैं। किसी नारे का इतिहास जानना हो, तो ऐसे दिनांकित समाचार स्रोत ज़्यादा भरोसेमंद हैं।

किसी नारे की सच्चाई कैसे जाँचें?
- देखें कि पेज पर नारे के साथ कोई स्रोत, तारीख़ या चुनाव का नाम है या नहीं।
- नारे को किसी दिनांकित अख़बार या आधिकारिक सामग्री में खोजें।
- स्रोत न मिले तो उसे “उदाहरण” लिखें, “मशहूर नारा” नहीं।
चुनाव आयोग के आधिकारिक संदेश: “चुनाव का पर्व, देश का गर्व”
भारत निर्वाचन आयोग ने 2024 के आम चुनाव के अभियान का थीम “चुनाव का पर्व, देश का गर्व” रखा था। यह जानकारी आयोग के प्रेस नोट में दर्ज है।
उसी सामग्री में “My Vote, My Duty” वीडियो और मतदाता जागरूकता गतिविधियों का भी ज़िक्र है। यानी आयोग का ज़ोर मतदान में भागीदारी पर रहा।

ध्यान रहे, यह जागरूकता का थीम है, किसी दल का प्रचार नारा नहीं। इसे किसी उम्मीदवार के पोस्टर पर समर्थन की तरह न जोड़ें।
SVEEP और “मेरा वोट, मेरा कर्तव्य”: जागरूकता सामग्री कहाँ मिलेगी
SVEEP आयोग का प्रमुख मतदाता शिक्षा कार्यक्रम है, जो मतदाताओं को जागरूक करने और चुनावी साक्षरता बढ़ाने के लिए 2009 से चल रहा है। यह आयोग की अपनी जानकारी है।
आयोग के मतदाता शिक्षा पृष्ठ पर SVEEP का परिचय है और हिंदी संस्करण की सामग्री का भी उल्लेख है। स्कूल या मोहल्ले के कार्यक्रम के लिए यही सबसे सुरक्षित शुरुआत है।

हर सामग्री के उपयोग की शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी चित्र या वीडियो को आगे बाँटने से पहले उसी पृष्ठ पर शर्तें देख लें।
- आयोग का मतदाता शिक्षा पृष्ठ: SVEEP का विवरण और हिंदी सामग्री की जानकारी।
- SVEEP पोर्टल: मतदाता शिक्षा और भागीदारी से जुड़ी सामग्री।
अच्छा चुनावी संदेश कैसे लिखें: जाँचने के मानदंड
अच्छा संदेश छोटा, साफ़ और काम या वादे पर आधारित होता है। लंबी लाइन पोस्टर पर पढ़ी नहीं जाती और फ़ोन पर भी छूट जाती है।

- एक संदेश में एक ही विचार रखें।
- सरल हिंदी चुनें, जिसे हर उम्र का व्यक्ति समझ सके।
- मुद्दे या काम पर ज़ोर दें, व्यक्ति पर नहीं।
- बोलने में सहज लय हो, ताकि भाषण या रैली में काम आए।
- जो आँकड़ा या दावा लिखें, उसका स्रोत पहले जाँच लें।
पोस्टर के लिए कितने शब्द ठीक रहते हैं?
इसका कोई सरकारी नियम नहीं है। व्यवहार में कम शब्द बेहतर रहते हैं, ताकि बड़े अक्षरों में दूर से पढ़ा जा सके। छपवाने से पहले किसी और से एक बार पढ़वाकर देख लें।
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आदर्श आचार संहिता: कौन-से संदेश नहीं लिखने चाहिए
जाति, धर्म या भाषा के नाम पर वोट माँगना या समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाना आदर्श आचार संहिता में मना है। वोट पाने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं से अपील करना भी इसमें शामिल है।

विरोधी दल की आलोचना नीतियों, वादों, पिछले रिकॉर्ड और काम तक सीमित रखने को कहा गया है। अप्रमाणित आरोपों और तथ्यों की तोड़-मरोड़ से बचना चाहिए।
क्या मैं किसी प्रतिद्वंद्वी पर तीखा सवाल उठा सकता हूँ?
हाँ, अगर सवाल उसकी नीति, वादे या सार्वजनिक काम पर हो और आपके पास उसका आधार हो। निजी हमले और बिना प्रमाण के आरोप से दूर रहें।
सोशल मीडिया, पोस्टर और बल्क संदेश: प्रमाणन और समय-सीमा
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है, और यह ऑनलाइन पोस्ट की गई सामग्री पर भी लागू रहती है। आयोग की उम्मीदवार पुस्तिका में यही बताया गया है।

उसी पुस्तिका के अनुसार सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम माने जाते हैं और पूर्व-प्रमाणन के दायरे में आते हैं। माध्यम और रूप के हिसाब से नियम बदल सकते हैं, इसलिए पोस्ट करने से पहले ताज़ा निर्देश देखें।
मतदान समाप्त होने के समय से पहले के 48 घंटों में प्रचार पर रोक रहती है। सही समय उसी चुनाव की अधिसूचना से जाँचें।
ज़िला निर्वाचन कार्यालय की सूचना भी देख लें, क्योंकि स्थानीय निर्देश अलग हो सकते हैं। आयोग का आदर्श आचार संहिता पृष्ठ इसका आधार है।

तुलना तालिका: संदेश के प्रकार, उपयोग और सावधानी
चार तरह के संदेश सबसे ज़्यादा मिलते हैं, और हर एक की स्रोत-स्थिति अलग है।
| संदेश का प्रकार | कहाँ उपयोगी | स्रोत की स्थिति | मुख्य सावधानी |
|---|---|---|---|
| आयोग का आधिकारिक थीम | जागरूकता कार्यक्रम, स्कूल, मोहल्ला | आयोग के प्रेस नोट में दर्ज | इसे किसी दल के समर्थन से न जोड़ें |
| जागरूकता संदेश | मतदान की अपील, सामुदायिक आयोजन | SVEEP जैसी आयोग की सामग्री उपलब्ध | उपयोग की शर्तें जाँचें |
| दल या उम्मीदवार का प्रचार नारा | पोस्टर, रैली, सोशल मीडिया | उम्मीदवार की टीम तय करती है | आचार संहिता और पूर्व-प्रमाणन देखें |
| इंटरनेट पर संकलित नारे | प्रेरणा या नमूने के रूप में | असली इस्तेमाल का प्रमाण अक्सर नहीं मिलता | उन्हें ऐतिहासिक या आधिकारिक न बताएँ |
उपयोग के हिसाब से चेकलिस्ट
संदेश छापने या भेजने से पहले ये पाँच बातें देख लें, चाहे माध्यम पोस्टर हो, व्हाट्सऐप, भाषण या स्कूल का कार्यक्रम।

- क्या नारे या आँकड़े का स्रोत मिला?
- क्या संदेश किसी जाति, धर्म या भाषाई समुदाय को निशाना बना रहा है?
- क्या हर दावा तथ्य के रूप में जाँचा जा सकता है?
- क्या यह ऑनलाइन विज्ञापन है, जिसके लिए पूर्व-प्रमाणन चाहिए?
- क्या प्रचार रोक की समय-सीमा आपके चुनाव की अधिसूचना से मिलाई?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ऑनलाइन नारे असली चुनावों में इस्तेमाल हुए हैं?
यह हर नारे के लिए अलग से जाँचना पड़ेगा। जिन संकलन पेजों को हमने देखा, उनमें नारों के असली इस्तेमाल का प्रमाण नहीं मिला। इसलिए उन्हें उदाहरण ही मानें।
जागरूकता संदेश और प्रचार नारे में क्या अंतर है?
जागरूकता संदेश सबको मतदान के लिए प्रेरित करता है। प्रचार नारा किसी दल या उम्मीदवार के पक्ष में वोट माँगता है।

क्या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी आचार संहिता लागू होती है?
हाँ। आयोग की उम्मीदवार पुस्तिका के अनुसार आचार संहिता पोस्ट की गई सामग्री पर भी लागू होती है।
आयोग की हिंदी मतदाता सामग्री कहाँ देखें?
आयोग के मतदाता शिक्षा पृष्ठ पर SVEEP की जानकारी और हिंदी संस्करण की सामग्री का उल्लेख है।
जाति या धर्म की अपील क्यों टालनी चाहिए?
क्योंकि आदर्श आचार संहिता वोट के लिए ऐसी अपील और समुदायों में दुश्मनी बढ़ाने वाली गतिविधियों को मना करती है।
आज का अगला कदम: आयोग के मतदाता शिक्षा पृष्ठ पर जाकर हिंदी सामग्री देखें। संदेश बनाने से पहले आचार संहिता का सार भी पढ़ लें।
संदर्भ
- Duniya Hai Gol, चुनाव पर नारे: https://www.duniyahaigol.com/election-slogan-in-hindi/
- अमर उजाला, चुनावी नारे (2014): https://www.amarujala.com/lucknow/indian-election-slogan
- भारत निर्वाचन आयोग, आम चुनाव 2024 प्रेस नोट: https://elections24.eci.gov.in/docs/press-note-no-23.pdf
- भारत निर्वाचन आयोग, मतदाता शिक्षा: https://www.eci.gov.in/voter-education
- भारत निर्वाचन आयोग, आदर्श आचार संहिता: https://www.eci.gov.in/mcc
- भारत निर्वाचन आयोग, उम्मीदवार पुस्तिका (2023): आयोग की उम्मीदवार पुस्तिका (PDF)
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